How parents manage After School Activity

क्या आप मानते है के आप के  बच्चे को स्कूल के बाद की एक्टिविटी के लिया सप्ताह मै 5 दिन या 3 दिन के लिए बहार जाना चाहिए या किसी हॉबी क्लास को ज्वाइन करना चाइये  ? किसी भी माता पिता के लिया यह न समज पाना आम बात है की किनते समय के लिया बच्चो को भेजा जाये।  माता-पिता का थोड़ा भ्रमित होना आम बात है। 

उनका तर्क है कि अधिकांश गतिविधियां पढ़ाई से हट कर मजेदार होती हैं (अलग है) ), बच्चे इन कक्षाओं का आनंद उठायेंगे।  लेकिन, जरुरत से ज्यादा शामिल हो जाना या बहुत काम शामिल होना, दोनों बातो पर धयान देना बहुत जरुरी है ।  ज्यादा मज़ा आना बच्चे को बीमार भी कर सकता है, या उनहे उन के मकसद से ब्राहमित भी कर सकता है। यहाँ कुछ हमारे सुझाव है जो यह मदद करगे की कि आपके बच्चे के लिए कितना समय शामिल होना उचित रहेगा ।

5  साल तक के बच्चो के लिए :

आपका बच्चा जब स्कूल जाना शरू करता है तब वो बातचीत करना और आदत डालना सीखना शुरू कर रहा है एक अनुशासन मै आना सिख रहा है । उसका या उसके बाद का स्कूल जीवन सरल और लापरवाह होना चाहिए। प्रति सप्ताह एक या दो कक्षाएं शुरुआत में पर्याप्त हैं। ऐसी गतिविधियों मै उसे शामिल किया जय जहा वो किसी प्रतिस्पर्धी मै न आये , कोई बंदिश न हो। जहा उसे खुला माहौल मिले । 

एक बार बच्चा क्लास का मतलब जान जाये तब उसे किसी हॉबी क्लासेज मै भेजा जय वो भी एक सिमित समय के लिए। पेरेंट्स अपनी सुविधा के अनुसार बच्चो को लम्बे समय तक क्लासेज मै छोड़ देना उचित नहीं है। अक्सर देखा गया है की पेरेंट्स अपने समय के अनुसार रात को भी इन छोटे बच्चो से सवालों की बौछार करना चालू कर देते है यह वो समय होता है जब बच्चे को आप के पूरे समय की जरुरत होती है ।  

6 साल से ....
इस उम्र के लिए शारीरिक गतिविधियां और गैर-खेलकूद सप्ताह मै एक या दो बार सर्वोत्तम हैं। Outdoor खेलने के लिए मैदान या घर के बहार तये समय के अनुसार भेजे  । प्रतिस्पर्धी वाले खेल गतिविधियों से बचें।  हार या जीत की चिंता करने के लिए बच्चा अभी युवा है क्यूंकि स्कूल के पूरे दिन की पढ़ाई व स्कूल एक्टिविटीज,  के बाद , उसे ऊर्जा के लिए एक स्वस्थ आउटलेट की आवश्यकता होती है।

7 साल से । 
आपका बच्चा बड़ा हो गया है, वह क्या ाचा है और क्या बूरा है इस गतिविधियों को जानने लग जाता है और अपनी राय देता चाहता हे। खेल, स्केटिंग, तैराकी या कंप्यूटर - उसे उस की पसंद की गतिविधियों की ओर ले जाते हैं वह अपने अनुसार पसंद करता है। कई बच्चे इसके आसपास एक संगीत वाद्ययंत्र पर पाठ शुरू करते है।  इस समय  अपने बच्चे को कुछ 'अकेले समय' की अनुमति दें, जिसके दौरान वह आराम कर सकता है और यह सोच सकता है की वह क्या चाहता है और क्या नहीं। 

8 साल से 

टीम के खेल खेलना एक अच्छे विकल्प मै से हैं। पेंटिंग, ड्राइंग क्राफ्ट आदि भी अच्छे हैं। बच्चे को उन के अनुसार गतिविधि चयन करने मै मदद करे । लेकिन परिवार के साथ के लिए पर्याप्त समय व मस्ती वाले पालो को जीने के लिए छोड़ दें। 

इस उम्र तक अब  बच्चा आपको बताएगा कि उसे क्या पसंद है। उसे क्या पाने की जरूरत है वह उन गतिविधियों में शामिल होना पसंद करेगा  जो उसके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, इससे मदद मिलेगी । 

लेकिन अब समय है की बच्चो पर एक सुन्योजित तरीके से निगरानी रखी जाये , जिस का आभास उनहे न हो ,  अन्य गतिविधियों के साथ अपने स्कूली कार्य को संतुलित करना महत्वपूर्ण है । आपके बच्चे को अधिक समय की आवश्यकता है उसकी पढाई। उसे एक करीबी पर्यवेक्षण की आवश्यकता है। एक या दो दिन मुफ्त रखें परिवार का समय और अन्य गतिविधियाँ। अब अपने बच्चे को पाने के लिए एक महान समय है, उसे सोशल रिलेशन्स कैसे और क्यों बनाये जाते है इस बात के जानकारी भी होनी चाइये ।

मिडिल स्कूल से-----
उसे टीवी से दूर भगाओ। उसे ऐसी गतिविधियों में शामिल करें जो सुदृढ़ हों।   बच्चो को अब भगवन के प्रति आस्था व उस के महत्व की जानकारी भी दी जनि चाइये। इस प्रतिस्पर्था के समय ज्यादा से ज्यादा वक़्त Books Reading मै देना , News paper  पड़ना Discovery  जैसे चैनल्स को देखना, परिवार मै समय देन।  

खेल कूद के लिया किसी क्लब को ज्वाइन करवाना जहा एक सिमित समय के लिए नियमित रूप से जाए जैसे  Basketball, Badminton, Swimming, Cricket, Cycling Gym  आदी , रोज 2-3 घंटे से ज्यादा समय नहीं दिया जाना चाइये।  

आप अपने बच्चे के लिए क्या चुनते हैं और उसे कब तक काम करना चाहिए मूल रूप से बच्चे के स्वभाव से तय होता है। माता-पिता के रूप में, आपको चाहिए अपने बच्चे का बारीकी से निरीक्षण करें और फीडबैक के आधार पर अपने निर्णयों को आधार बनाएं यही वो समय है जहा से बच्चे की नीव को रूप दिया जा सकता है बच्चो के अंदर इस वक़्त एक बदलाव आना स्वाभाविक होता है। 

निर्णय आप का सही होना ज्यादा मायने रखता है की किस बात के लिए किस हद तक टोका जाए, बच्चो की साथ कितना दोस्ताना होया जाए , बच्चो को जरुरत से ज्यादा रोकना या दबाव डालना हानिकारक हो सकता  है ,

बच्चो को खर्चे के लिए कितने पैसा देना इस निर्णय पर विशेष धयान देना चाइये ,आप के पास कितना है या नहीं है यह मायने नहीं रखता परन्तु बच्चो को पैसा का महत्व होना आती आवशयक है ।  एक तरफ जरुरत की चीजों को उपलब्ध करवाना  और दूसरी तरफ हाथ खर्ची के लिए पैसा देना दोनों मै बहुत अंतर है  । 

निर्णय आप का, क्या सही क्या गलत , कितना समय देना और कितना नही। 

नमस्कार 
शैलेन्द्र पोरवाल 

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