ख़ुशी का महत्व .......दोस्ती की पहचान (By Shailendra Porwal)
ख़ुशी का महत्व .......दोस्ती की पहचान
परीक्षा के बाद हमेशा रिजल्ट का इंतज़ार रहता है , ऐसा ही कुछ अक्षत के साथ था हो रहा था उस की इस बैचनी को देख कर अक्षत के पापा की बड़े चिंतित थे की आज रिजल्ट को ले कर यह इतना excited क्यों है क्यूंकि वो जानते थे की अक्षत पढ़ाई के प्रति sincere नहीं है हमेशा डाट खता रहता था ।
लेकिन यह क्या रिजल्ट अक्षत के सामने था और वो भी हर subject मे top नंबर्स फिर भी वह परेशान दिख रहा था। उसे समज नहीं आ रहा था की की खुश मनौ या गम ।
आखिर अक्षत के साथ ऐसा क्यों हो रहा था… क्या हुआ था उस के साथ जो वो खुश नहीं था।
दरसल अक्षत और मनोज दोनों दोस्त थे , एक ही क्लास मे और ज्यादा समय पास पास ही बैठा करते थे। लकिन दोनों के स्वाभाव मे बहुत अंतर था , एक और मनोज शांत स्वाभाव का और पढ़ाई मे भी होशियार वही दूसरी और अक्षत शरारती स्वाभाव का कभी भी चुप नहीं बैठना। हर समय कोई ना कोई शरारत सूझते रहती थी। Class मे Teacher के सवाल पूछने पर हमेशा मनोज पहले जवाब देता Copy मे काम भी हमेशा पूरा रहता। अक्षत को यह बात बुरी लगती थी , वह अपना सारा समय उसे निचा दिखने मे लगा रहता था । कभी उस का पेन ले कर गिरा देना, कभी copy के pages फाड् देना और कुछ नहीं तो उस के ध्यान teacher की तरफ से हटाना , इन सब हरकतों मे वो इतना समा गया था की अपनी पढ़ाई बिलकुल बंद कर दी।
कहने को तो वो दोनों दोस्त है , हमेशा साथ लंच लेट , घर साथ जाते और ज्यादा समय साथ ही रहते लकिन अक्षत मन ही मन उस से नफरत करता, हमेश उसे निचा दिखने की कोशिश मे रहता था। एक बार मौका देख कर लंच के समय जब मनोज बहार गया तब अक्षत ने उस के बैग के science की कॉपी निकल ली। Class मे Science Teacher ने जब copy मांगी तब उस के पास न होने के कारन उसे खूब डाट पड़ी जिसे देख कर अक्षत बहुत प्रस्सनता महसूस कर रहा था एक Sincere स्टूडेंट के साथ ऐसा होने पर वो insult महसून करने लग जाता है।
इस बात का आभास मनोज को भी होने लगा। मनोज जो शांत स्वाभाव का था उसे यह बात मन ही मन सताने लगी थी और व् धीरे धीरे depression मे जाने लगा था । यह हालत देख मनोज के parents भी परेशान होने लगे , पता लगने पर उसे समजने की कोशिश करी और उस से दूर रहना को कहा , लकिन वो इस बात को भुला न सका और वह हीन भावना का ऐसा शिकार हुआ था कि निकल ही नहीं पा रहा था।
देखते देखते exam का समय आ गया , अक्षत किसी भी तरह से मनोज को आगे नहीं बढ़ाने देना चाहता था। इसी समय अक्षत को कही से exam paper हाथ लग गए , जो किसी शरारती बच्चे के द्वारा चुराए हुए थे। मनोज को निचा दिखने की लालच मे अक्षत ने पेपर ले लिया और तैयारी कर के exam देने चला गया। अक्षत की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था । Exam ख़तम हो गए और अक्षत Top भी आ गया। उसने मनोज की तरफ मुस्कान से देखा। आज वह बहुत खुश था उसने मनोज को पीछे जो छोड़ दिया था।
मनोज बहुत निराश था लकिन उसने अक्षत को उस के सफलता की सफलता पर बहुत बधाई दी और उसे गले लगा लिया। मनोज का गले मिलाना अक्षत को असमंजस मे दाल दिया। मन से मन विचार आने लगा की जिस को मे हमेश निचा दिखते की कोशिश करता हो , insult करता हो आज वो मुझे गले लगा कर बधाई दे रहा है। अक्षत को अपनी वो साडी शरारते अब मन ही मन सताने लगी थी उसे समज नहीं आ रहा था की top आने पर खुश होए या अफ़सोस करे।
क्यूंकि जो उसे मिला वो एक छल था जो उस ने अपने सबसे खास दोस्त के साथ करा और जो इस का वाकई हक़दार था वो खली हाथ रहना पड़ा अब अक्षत को ड़ी शर्मिंदा हो रही थी, अच्छे अंक भी उसे बार-बार उसकी गलतियों का एहसास करा रहे थे।
अब अक्षत ने मन मे ठान लिया था की मे सब के सामने अपनी गलती कबूल करूँगा , इस के लिया मुझे कोई भी सजा क्यों न मिले । अगर मुझे स्कूल से भी निकल दिया जाएगा या मेरी पूरी क्लास मे insult भी कर दी जाएगी तो भी मे सच्चाई बताने से पीछे नहीं हटूंगा।
अगले दिन class मे अक्षत को बुलाया गया, तालिया बजी शाबाशी मिली (पर मन ही मन वो बहुत दुखी हो रहा था) Teacher ने पुछा
"अक्षत बताओ आप ने यह Top Renk कैसे कैसे हासिल करी"
अक्षत बड़े उदास मन से बोर्ड की और आया, हाथ मे मार्कशीट और मन मे उदासी लिए और बोलै :
“सर, फर्स्ट रैंक तो हमेशा से मनोज को ही मिली है और आज रहा रेंक भी मेरी नहीं मनोज की है, मैं आप सभी से माफ़ी मांगता हूँ… मैंने चीटिंग की है, मैंने अपने सब से प्रिय दोस्त को धोका दिया है , मे कुछ पल के लिए भटक गया था और बस मनोज को नीचा दिखाना था इसलिए मैंने पेपर आउट करा दिया था।
सर, आप इसकी जो चाहे वो सजा मुझे दे सकते हैं।"
I am really sorry my friend ! मैंने हमेशा तुम्हे परेशान किया पर आज जब तुमने मुझे गले लगा कर बधायी दी तो मेरा मन रो पड़ा ।” बस इतना कहते ही अक्षत की आखो मे पानी आ गया।
एक शरारती को इस तरह अपनी गलती का एहसास करते देख और रोते हुए सब भावुक हो गए। मनोज तुरंत अक्षत के पास आया और उसे गले लगा लिया।
"अक्षत my dear student आज आप ने अपने स्वयं के द्वारा गलती को स्वीकार किया है। School and Management ने भी अक्षत की गलती को warning देते हुए पास कर दिया ।
MORAL
अब अक्षत को यह समाज आ गया था की बेईमानी से पायी गयी सफलता कभी ख़ुशी नहीं दे सकती, असली ख़ुशी ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चल कर ही पायी जा सकती है।
शैलेन्द्र पोरवाल
Kota (Rajasthan)
9214311126



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